महबूब को जीता जा सकता है, हराया... Unknown October 25, 2018 महबूब को जीता जा सकता है, हराया नहीं जा सकता । "चौहान" Read More
दिल में हैं ग़म,तों पलक तले मोती क्यों है ? Unknown October 25, 2018 ग़ज़ल दिल में हैं ग़म,तों पलक तले मोती क्यों है ? पीड़ ए उलफ़त, सागर की तरह दिखती क्यों है ? गैरों से जो इक दिन , हो जाती है मोहब्बत, यारो... Read More
बाकमाल बाकमाल -1 Unknown October 25, 2018 मेरे अहसास में आ कर मेरी आंखों को बंद करना मैं कौन अकसर उनका कहना जाना जाना सा सवाल तनहाई का कमाल बाकमाल बाकमाल । "चौहान... Read More
यही तो शायरी है यही तो बंदगी है । Unknown October 24, 2018 शब्द बराबर शब्द का तौलना दर्द बराबर दर्द फरोलना अपने कातिल को कहना ढोलना यही तो शायरी है यही तो बंदगी है । "चौहान" Read More
बिखरे को जोड़ने का हुनर अगर नहीं, तो... Unknown October 23, 2018 बिखरे को जोड़ने का हुनर अगर नहीं, तो जुड़े को बिखरने से बचाने का गुन हम सब के लिए सीखना अति जरूरी है । " चौहान" Read More